राजस्थान में अरावली पर्वतमाला चर्चा में क्यों है?
हाल ही में राजस्थान की अरावली पर्वतमाला एक बार फिर चर्चा में आई है। राज्य सरकार और पर्यावरण से जुड़ी संस्थाओं ने अरावली क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण, अवैध खनन और हरित आवरण की कमी पर गंभीर चिंता जताई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली राजस्थान की पारिस्थितिकी के लिए एक “प्राकृतिक ढाल” है, जो रेगिस्तानीकरण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अरावली पर्वतमाला का भूगोलिक महत्व
- स्थिति: अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है, जो गुजरात के पालनपुर से लेकर दिल्ली तक फैली हुई है।
- राजस्थान में विस्तार: इसका एक बड़ा भाग राजस्थान में स्थित है — विशेष रूप से अलवर, सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर और भीलवाड़ा जिलों में।
- प्रमुख शिखर: राजस्थान में इसका सबसे ऊँचा शिखर गुरु शिखर (1722 मीटर) माउंट आबू में स्थित है।
हाल की स्थिति और पहल
- राजस्थान अरावली पर्वतमाला पर सुप्रीम कोर्ट फैसला: 90% पहाड़ियां खतरे में!
- राजस्थान की प्राचीन अरावली पर्वतमाला पर सुप्रीम कोर्ट का नवंबर 2025 का फैसला चर्चा में है।
- कोर्ट ने 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली श्रेणी से बाहर कर दिया, जिससे राज्य की 12,000+ पहाड़ियों में से 90% सुरक्षा खो सकती हैं।
क्यों है विवाद?
- खनन का खतरा: अवैध खनन बढ़ने से भूजल स्तर गिरेगा, थार रेगिस्तान फैलेगा।
- पर्यावरण प्रभाव: वायु प्रदूषण, जैव विविधता नुकसान, और जल संकट संभव। पूर्व CM अशोक गहलोत ने #SaveAravalli कैंपेन शुरू किया।
- प्रदर्शन: उदयपुर, जयपुर में धरने, 26 दिसंबर को बड़ा मार्च।
- राजस्थान सरकार ने अरावली पुनरुद्धार अभियान (Aravalli Restoration Drive) की योजना शुरू करने की घोषणा की है, जिसमें वन विभाग और स्थानीय निकायों की संयुक्त भागीदारी होगी।
- इस अभियान का उद्देश्य है — अवैध खनन पर रोक, हरित आवरण बढ़ाना, और जल स्रोतों का संरक्षण।
- नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (NGT) ने भी हाल ही में अरावली क्षेत्र में पर्यावरणीय उल्लंघनों पर सख्त टिप्पणी की है और राज्य से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
अरावली फैसले से प्रभावित जिलों की सूची क्या है
- राजस्थान में अरावली पर्वतमाला का विस्तार लगभग 20 जिलों में है, जहाँ सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2025 फैसले (100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों पर खनन अनुमति) से खनन गतिविधियाँ प्रभावित होंगी।
- फैसले से 1000+ खानों पर असर पड़ेगा, लेकिन 90% कम ऊँचाई वाली पहाड़ियाँ राहत पा सकती हैं।
प्रभावित प्रमुख जिले
जिले अरावली श्रेणी से सीधे जुड़े हैं, जहाँ अवैध खनन, संरक्षण और रेगिस्तानीकरण का खतरा बढ़ा है:- अलवर,जयपुर ,सीकर,झुंझुनू, अजमेर, भीलवाडा, राजसमन्द, उदयपुर, पाली, सिरोही, डूंगरपुर,चितोडगढ़, दौसा, करौली और नागौर आदि I
पर्यावरणीय महत्व
- अरावली पर्वतमाला थार रेगिस्तान और पूर्वी राजस्थान के बीच जलवायु संतुलन बनाए रखती है।
- यह भू-जल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण, और मृदा अपरदन की रोकथाम में अहम भूमिका निभाती है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अरावली का क्षरण जारी रहा तो आने वाले वर्षों में रेगिस्तानी विस्तार बढ़ सकता है, जो राजस्थान के कृषि और जल संसाधनों पर गहरा प्रभाव डालेगा।
निष्कर्ष
अरावली पर्वतमाला केवल राजस्थान की भूगोलिक पहचान नहीं, बल्कि पर्यावरणीय सुरक्षा का आधार स्तंभ है। इसलिए सरकार, स्थानीय समुदाय और नागरिकों की संयुक्त जिम्मेदारी है कि इस प्राकृतिक धरोहर की रक्षा की जाए।
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