सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026 |1000 वर्ष की आस्था एवं पुनर्निर्माण की गाथा | राष्ट्रीय पर्व

गुजरात के प्रभास पाटन (जिला गिर‑सोमनाथ) स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को “प्रथम ज्योतिर्लिंग” माना जाता है और इसे बार‑बार टूटकर फिर से उठ खड़े होने वाले भारतीय सभ्यता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

जनवरी 1026 में महमूद गजनवी द्वारा किए गए विनाशकारी आक्रमण के लगभग 1000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 8 से 11 जनवरी के बीच “सोमनाथ पर्व” जैसे आयोजन इतिहास, आस्था और राष्ट्र चेतना को पुनः स्मरण कराते हैंI

🔹 सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026

  • सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : 8 से 11 जनवरी 2026 तक प्रभास पाटन (गुजरात) में आयोजित।
  • यह आयोजन सोमनाथ मंदिर पर प्रथम आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के प्रतीक रूप में मनाया जा रहा है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर सोमनाथ मंदिर जाकर शौर्य यात्रा में भाग लिया, ओंकार मंत्र, पूजा-अर्चना की और मंदिर को “भारत की अविच्छिन्न संस्कृति का प्रतीक” बताया।

🔹 सोमनाथ मंदिर: ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

🔹 परिचय –

  • सोमनाथ मंदिर, प्रभास पाटन, गिर सोमनाथ (गुजरात) में स्थित है।
  • यह 12 आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। मंदिर का स्थान समुद्र के किनारे है, जो इसे विशेष तीर्थ स्थल बनाता है।

🔹 मंदिर पर आक्रमणों का इतिहास

सोमनाथ मंदिर पर हुए मुख्य आक्रमणों की समय रेखा मध्यकालीन भारत के आक्रमणों का प्रतिबिंब है, जिसमें इस्लामी आक्रांताओं ने धार्मिक व आर्थिक लालच से बार-बार हमले किए।

🔹 मुख्य आक्रमणों की समय रेखा

वर्ष /ईस्वी आक्रांता घटना विवरण
725अल जुनैद
सिंध का अरब
गवर्नर
पहला दर्ज आक्रमण-मंदिर लूटा और क्षतिग्रस्त, बाद में नागभट्ट द्वितीय ने पुनर्निर्माण कराया।
1025-26महमूद गजनवीसबसे विनाशकारी हमला; ज्योतिर्लिंग तोड़ा, 20 लाख दीनार मूल्य का सोना-चाँदी लूटा, 70,000 हिंदू मारे गए।
1299अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति (उलुग खान, नुसरत खान)गुजरात विजय के दौरान मंदिर तोड़ा और लूटा।
1395जफर खानमंदिर को नष्ट किया।
1412अहमद शाहगंभीर क्षति पहुँचाई।
1469महमूद बेगड़ापूजा पर रोक लगाई।
1665-1706औरंगज़ेबमुगल फरमान से मंदिर ध्वस्त, मस्जिद में तब्दील करने का प्रयास।

सोमनाथ मंदिर जीर्णोद्धार

सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कई बार विभिन्न शासकों द्वारा कराया गया, जो इसके बार-बार ध्वस्त होने के बाद हिंदू पुनरुत्थान का प्रतीक रहा।वर्तमान मंदिर का प्रमुख पुनर्निर्माण स्वतंत्र भारत में सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में हुआ।

प्रमुख पुनर्निर्माण घटनाएँ

वर्षनिर्माण कर्ता विवरण
815नागभट्ट द्वितीय (प्रतिहार राजा)अल-जुनैद के आक्रमण के बाद लाल बलुआ पत्थर से पुनर्निर्माण।
997मुलराज सोलंकीचालुक्य शैली में जीर्णोद्धार।
1026-1060भीमदेव प्रथम (सोलंकी) व भोज परमारमहमूद गजनवी के विनाश के बाद पुनर्निर्माण।
1143-1172कुमारपाल (चालुक्य)भव्य स्वर्णिम शिखर वाला मंदिर बनवाया।
1308महिपाल प्रथम (चुडासमा)अलाउद्दीन खिलजी के बाद शिवलिंग की पुनः स्थापना।
1947-51सरदार वल्लभभाई पटेलजूनागढ़ विलय के बाद पहल-गांधीजी के सुझाव पर जनधन से नागर शैली में निर्माण; 11 मई 1951 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा।

सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं — यह भारत की सशक्तीकरण कथा, अटूट विश्वास और पुनर्जागरण के साहस का महान उदाहरण है।यह पर्व आज केवल अतीत को याद करने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी पहचान, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव का स्मरण कराने का भी एक अवसर है।

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