राजस्थान पंचायत पुनर्गठन 2025: नई पंचायतें, वार्ड, पंचायत समिति व जिला परिषद – चुनाव कब होंगे?

राजस्थान में हाल ही में पंचायती राज संस्थाओं के बड़े पुनर्गठन के बाद राज्य चुनाव आयोग ने चुनावी तैयारी तेज कर दी है, जिससे नई पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों में जल्द ही चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

यह पुनर्गठन विशेष रूप से ग्रामीण विकास, प्रशासनिक सुविधा और ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ जैसे प्रयासों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

पंचायती राज पुनर्गठन क्या है ?

  • राज्य सरकार ने सभी 41 जिलों में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नई ग्राम पंचायतों के सृजन की अधिसूचना 20–21 नवंबर 2025 के आसपास जारी की है।
  • इस पुनर्गठन से ग्रामीण प्रशासन की भौगोलिक सीमाएं बदली हैं, कई जगह पुरानी पंचायतों के क्षेत्रों का पुनर्सीमांकन हुआ और हजारों नई पंचायतें गठित की गई हैं, खासतौर पर बाड़मेर, जोधपुर, बांसवाड़ा जैसे जिलों में।

नई पंचायतों की संख्या व मापदंड

  • विभिन्न समाचार रिपोर्टों के अनुसार पुनर्गठन के बाद राज्य में लगभग 3,400 नई ग्राम पंचायतें जोड़ी गईं, जिससे कुल ग्राम पंचायतों की संख्या लगभग 14,635के आसपास पहुंच गई है (पूर्व संख्या लगभग 10,500 के करीब मानी जा रही थी)।
  • ग्राम पंचायत बनाने के मुख्य मापदंडों में जनसंख्या, भौगोलिक दूरी, निवासियों की सुविधा, प्राकृतिक बाधाएं (रेगिस्तानी, वन क्षेत्र आदि) और राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 98 के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग शामिल है।

नई पंचायत समितियाँ: संख्या व मापदंड

  • जयपुर समेत कई जिलों में पंचायत समितियों का बड़े स्तर पर पुनर्गठन किया गया, जैसे जयपुर जिले में 20 पंचायत समितियों की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया और कुछ नई समितियाँ गठित की गईं।
  • पंचायत समिति के गठन/पुनर्गठन के मापदंडों में विधायक क्षेत्र, तहसील मुख्यालय, मुख्य सड़कों से संपर्क, जनसंख्या घनत्व तथा प्रशासनिक सुविधा (ब्लॉक स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन) को आधार माना गया है, जिसे कैबिनेट सब-कमेटी और जिला स्तर की रिपोर्टों के आधार पर अंतिम रूप दिया गया।
  • राज्य स्तर पर कुल नई पंचायत समितियों की सटीक संख्या (जैसे 450 का आंकड़ा) जिलेवार अधिसूचना व पीडीएफ में समेकित रूप से दी गई है; इसे आधिकारिक सूची से अद्यतन करना चाहिए, क्योंकि समाचार रिपोर्टें ब्लॉक/जिले-विशिष्ट उदाहरण दे रही हैं।

जिला परिषद संख्या व मापदंड

  • राजस्थान में वर्तमान में 41 जिले हैं और इन्हीं 41 जिलों के लिए जिला परिषद स्तर पर पंचायती राज ढांचे का पुनर्सीमांकन किया गया है, ताकि नई बनी पंचायत समितियों और पंचायतों के अनुरूप जिला परिषद क्षेत्र की संरचना स्पष्ट हो सके।
  • जिला परिषद के लिए मापदंड मुख्यतः जिले की राजस्व सीमाएं, जनसंख्या, नई पंचायत समितियों का वितरण और योजनाओं के जिला-स्तरीय समन्वय की आवश्यकता पर आधारित हैं; यानी जिला परिषदों की संख्या जिले की संख्या के बराबर ही रखी जा रही है, परन्तु आंतरिक क्षेत्रीय सीमाएं समायोजित हुई हैं।

पुनर्गठन के बाद कुल संरचना

पुनर्गठन के बाद

  • ग्राम पंचायतें: लगभग 14,635(लगभग 3,400 नई पंचायतों के बाद)
  • जिला परिषदें: 41 (राज्य के जिलों की संख्या के बराबर )
  • पंचायत समितियाँ: जिलेवार पुनर्गठन के बाद संख्या बढ़ी है, पर राज्य स्तर पर समेकित अंतिम आंकड़ा अभी जिलों की अंतिम अधिसूचनाओं के समेकन के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने आएगा; कैबिनेट सब-कमेटी की रिपोर्ट और आधिकारिक पीडीएफ के आधार पर इसे अपडेट किया जाएगा।

पंचायतों में वार्ड बनाने की प्रक्रिया व मापदंड

हाल की अधिसूचना के अनुसार वार्डों के पुनर्गठन के आदेश जारी किए गए हैं, जिनके तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर वार्डों की नई सीमा तय की जा रही है।

ग्राम पंचायत स्तर पर सामान्य मापदंड इस प्रकार रखे गए हैं:

  • लगभग 3,000 तक की जनसंख्या वाली ग्राम पंचायत में 7 वार्ड।
  • अधिक जनसंख्या होने पर वार्डों की संख्या क्रमशः बढ़ाई जा सकती है, ताकि प्रत्येक वार्ड की मतदाता संख्या अपेक्षाकृत संतुलित रहे।

वार्ड सीमांकन में मुख्य आधार –

  • मतदाता संख्या की समानता, भौगोलिक एकरूपता, सामाजिक समरसता, प्राकृतिक/कृत्रिम बाधाएं (नदी, हाईवे आदि) और प्रशासनिक सुविधा को रखा जा रहा है,
  • ड्राफ्ट सूची जारी कर आपत्तियाँ/सुझाव आम जनता से मांगे जा रहे हैं।

पंचायती राज चुनाव की संभावित अवधि

  • हाईकोर्ट में दायर हलफनामों व बाद की कार्यवाही में सरकार ने पहले स्पष्ट किया था कि ग्राम पंचायत चुनाव जून 2025 से पहले नहीं कराए जा सकेंगे, क्योंकि पुनर्गठन व मतदाता सूची का कार्य पूरा होना बाकी है।
  • बाद में राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार की ओर से संकेत मिला कि पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव दिसंबर 2025 तक एक साथ कराने पर विचार हो रहा है, ताकि “वन स्टेट वन इलेक्शन” की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।
  • निर्वाचन आयोग ने अगस्त 2025 में प्रेस वार्ता में कहा कि पंचायत व निकाय चुनाव की तारीखों की घोषणा 10 दिनों के भीतर की जाएगी और दो महीने में 11,000 से अधिक पंचायतों व 125 नगर निकायों में चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है; साथ ही 26 सितंबर से 29 अक्टूबर 2025 तक मतदाता सूची से जुड़े कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।

राजस्थान में पंचायत पुनर्गठन 2025 के तहत सभी 41 जिलों में ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों व जिला परिषद स्तर पर बड़े पैमाने पर सीमांकन और नई इकाइयों का गठन किया गया है, जिससे कुल ग्राम पंचायतों की संख्या लगभग 14 हजार के आसपास पहुंच गई है और वार्डों का नया भूगोल तैयार हो रहा है।

यह पुनर्गठन ग्रामीण विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, प्रशासन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने और आगामी पंचायत व निकाय चुनावों को नई सीमा और नई प्रतिनिधि संरचना के तहत करवाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नए ग्राम पंचायत बनाने के आधिकारिक मापदंड क्या हैं ?

  • राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 9 राज्य सरकार को किसी गाँव या गाँवों के समूह को पंचायत सर्किल घोषित करने की शक्ति देती है, लेकिन नए ग्राम पंचायतों के गठन के आधिकारिक मापदंड मुख्य रूप से 2011 जनगणना के आंकड़ों, जनसंख्या सीमाओं, भौगोलिक दूरी और प्रशासनिक सुविधा पर आधारित हैं।
  • हालिया पुनर्गठन (2025) में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने इन्हें स्पष्ट किया है।

मुख्य मापदंड

जनसंख्या आधार:

  • सामान्य क्षेत्रों में न्यूनतम 3,000 से अधिकतम 5,500 आबादी,
  • अनुसूचित क्षेत्रों, बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर में 2,500-5,000 आबादी
  • शेष जिलों में 4,000-6,500 आबादी

भौगोलिक व प्रशासनिक:

  • पंचायत मुख्यालय से अधिकतम 6 किमी दूरी; प्राकृतिक बाधाएँ (नदी, रेगिस्तान), सड़क संपर्क, जन सुविधा।
  • कोई राजस्व ग्राम विभाजित नहीं होगा।
  • एक ही विधानसभा क्षेत्र में – निवासियों की मांग, कलक्टर की रिपोर्ट।
  • पुनर्गठन के लिए 2019 पत्र (एफ.15(1) पुनर्गठन/विधि/544) में जनसंख्या व ग्राम संख्या पर जोर।

प्रक्रिया

  • राज्य सरकार जिला कलक्टरों से प्रस्ताव मंगवाती है (20 जनवरी-18 फरवरी 2025), धारा 101 के तहत ड्राफ्ट प्रकाशित कर आपत्तियाँ लेती है
  • (20 फरवरी-21 मार्च), निस्तारण के बाद अधिसूचना जारी करती है।
  • यह पंचायती राज नियम, 1996 के अनुरूप होता है

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