Rajasthan History Ncert Inspired Notes कक्षा 10 के पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है I यह Study नोट्स NCERT inspired Notes पर आधारित है और REET,DELED,RPSC एवं SSC जैसी परीक्षाओं के लिए उपयोगी तथ्यों और अवधारणाओं को सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है I अध्ययन सामग्री को व्याख्या सहित प्रश्नोत्तर के माध्यम से आसान भाषा में परीक्षापयोगी बनाया गया है I
Q&A With Explanation ( व्याख्या सहित प्रश्नोत्तर )
प्रश्न 1. राजस्थान भू-भाग के लिए सबसे पहले किसने ‘राजपुताना ‘ शब्द का प्रयोग किया ?
उत्तर – जॉर्ज थॉमस द्वारा
Explanation 👇
व्याख्या :- ‘ राजपुताना ‘ शब्द राजस्थान के लिए सबसे पहले 1800 ईस्वीं में जार्ज थॉमस ने किया I
प्रश्न 2. ‘ एनल्स एंड एंटीक्वीटीज ऑफ़ राजस्थान ‘ नामक पुस्तक किसने लिखी ?
उत्तर – कर्नल जेम्स टॉड
Explanation 👇
व्याख्या : – कर्नल जेम्स टॉड ने 1829 ई. में अपनी पुस्तक ‘ एनल्स एंड एंटीक्वीटीज ऑफ़ राजस्थान ‘ में राजस्थान के लिए ‘रायथान ‘ या ‘ राजस्थान ‘ नाम रखा I अत: राजस्थान के लिए सबसे पहले ‘राजस्थान’ नाम कर्नल जेम्स टॉड द्वारा प्रयोग किया गया I
प्रश्न 3. राजस्थान भू-भाग या भोगोलिक इकाई के लिए कब सर्व-सहमति से ‘राजस्थान ‘ नाम रखा गया ?
उत्तर – 30 मार्च, 1949 ई. में
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व्याख्या – भारत में स्वतंत्रता के बाद विभिन्न रियासतों का एकीकरण हुआ जिसमें राजस्थान की रियासतों का भी एकीकरण किया गया और 30 मार्च,1949 ई. को सर्व-सम्मति से ‘राजस्थान’ नाम रखा गया ,इसलिए राजस्थान दिवस प्रतिवर्ष 30 मार्च को मनाया जाता है I
प्रश्न 4. राजस्थान के किस क्षेत्र के लिए ऋग्वेद में मरू एवं धन्व नामों का उल्लेख हुआ है ?
उत्तर – जोधपुर के संभाग के मरुस्थल के लिए
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व्याख्या :- ऋग्वेद में राजस्थान के प्राचीनतम क्षेत्रों के लिए मरू,धन्व,मत्स्य,शूरसेन और जांगल नामों का उल्लेख हुआ है ,जिसमें जोधपुर के मरुस्थल के लिए मरु या धन्व, बीकानेर एवं नागौर के आसपास के भू-भाग के लिए जांगल, जयपुर -अलवर-भरतपुर तक का क्षेत्र मत्स्य तथा भरतपुर -मथुरा से लगे क्षेत्र-धोलपुर -करौली के क्षेत्र शूरसेन राज्य में शामिल थे I
प्रश्न 5. राजस्थान के दो प्राचीनतम क्षेत्र जिसका उल्लेख महाभारत में एक राज्य के रूप में हुआ है ?
उत्तर – मत्स्य प्रदेश एवं शूरसेन राज्य
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व्याख्या :- राजस्थान के प्राचीनतम क्षेत्र मत्स्य प्रदेश का विस्तार जयपुर, अलवर और भरतपुर तक फैला हुआ था, और शूरसेन राज्य में भरतपुर के जो मथुरा से लगे हुए क्षेत्र, धोलपुर और करौली के अधिकतर क्षेत्र शूरसेन राज्य में शामिल थे I इन दोनों क्षेत्रों का महाभारत में एक राज्य के रूप में उल्लेख हुआ है I
प्रश्न 6. राजस्थान के प्राचीनतम क्षेत्र का नाम जो माहि नदी के किनारे स्थित था ?
उत्तर – कांठल
Explanation 👇
व्याख्या :- भौगोलिक विशेषताओं के आधार पर राजस्थान के प्राचीनतम क्षेत्रों के नाम निम्न प्रकार है –
| भौगोलिक विशेषताओं के आधार पर क्षेत्र | प्राचीनतम नाम |
| माही नदी के किनारे स्थित प्रतापगढ़ का भू-भाग | कांठल |
| प्रतापगढ़-बांसवाडा के बीच छप्पन गावों का समूह | छप्पन का मैदान |
| भैसरोड़गढ़ -बिजोलिया तक फैला पठारी भू-भाग | ऊपरमाल |
| पहाड़ियों की अधिकता वाला उदयपुर का क्षेत्र | गिरवा |
| जैसलमेर का क्षेत्र | मांड |
| बांसवाडा-डूंगरपुर का प्राचीनतम क्षेत्र | बागड़ या वागड़ |
| कोटा-बूंदी का क्षेत्र | हाडौती का क्षेत्र |
| सीकर-झुंझुनू-चुरू का भू-भाग | शेखावाटी |
प्रश्न 7. मानव इतिहास का काल जिसका कोई लिखित साक्ष्य नही अर्थात उस काल का मानव लेखनकला से अपरिचित था ?
उत्तर – प्राक युग
Explanation 👇
व्याख्या :- मानव के सम्पूर्ण इतिहास को तीन कालों में बांटा गया है -(1) प्राक युग (2) आद्य युग (3) ऐतिहासिक युग 👉 (1) प्राक युग – मानव इतिहास का काल जिसका कोई लिखित साक्ष्य नही हो तथा उस काल का मनुष्य लेखनकला से अनभिज्ञ था I (2) आद्य युग – मानव इतिहास का काल जिसका लिखित साक्ष्य तो उपलब्ध है ,लेकिन उनकी लिपि को पढना असंभव है I (3) ऐतिहासिक युग – मानव इतिहास का कालक्रम जिसका स्पष्ट एवं सुपठित साक्ष्य लिखित में उपलब्ध है I
प्रश्न 8. भारतीय इतिहास के ऐतिहासिक युग की अवधि क्या है ?
उत्तर – 600 ई. पू. से वर्तमान तक
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व्याख्या :- भारतीय इतिहास के कालक्रम प्राक युग सृष्टि के आरम्भ से हडप्पा के पूर्व तक , आध्य युग हडप्पा सभ्यता के काल से 600 ई.पू. तक तथा ऐतिहासिक युग 600 ई.पू.से वर्तमान तक जारी है I
प्रश्न 9. मानव सभ्यता के प्राचीनतम भू-भागों में से एक राजस्थान में कौनसी नदियों के बहने की मान्यता है ?
उत्तर – सरस्वती एवं दृषद्वती नदियाँ
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व्याख्या :- विद्वानों की मान्यताओं के अनुसार राजस्थान के मरुस्थली भूमि में समुन्द्र विद्यमान था जिसमें सरस्वती एवं दृषद्वती नदियाँ गिरती थी I
प्रश्न 10. मानव सभ्यता के उद्भव काल को किस नाम से जाना जाता है ,तथा इसको कितने भागों में बांटा गया है ?
उत्तर – पाषाण काल और इसे तीन भागों में बांटा गया I
Explanation 👇
व्याख्या :- मानव सभ्यता के जन्म या उद्भव काल को पाषाण काल कहा गया तथा इसे पूर्व-पाषाण काल, मध्य पाषाण काल और उत्तर पाषाण काल में बांटा गया है I
प्रश्न 11. 1870 ई. में किसके द्वारा जयपुर एवं इन्द्रगद से पाषाणकालीन हस्त-कुठार ( Hand-axe ) की सर्वप्रथम खोज की गई ?
उत्तर – सी. ए. हैकेट द्वारा
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व्याख्या :- सी.ए. हैकेट द्वारा सर्वप्रथम पाषाणकालीन पत्थर से बनी हुई हस्त-कुठार ( Hand-axe ) जयपुर एवं इंद्रगढ़ में खोज की गई I इसके पश्चात झालावाड से सेटनकार ने पाषाणकालीन उपकरण खोजे तथा इसके बाद राजस्थान की पूर्व-पाषाणकालीन सभ्यता एवं संस्कृति के पक्ष को सामने लाने में भारतीय पुरातत्व एवं संग्राहलय विभाग (नई दिल्ली ), वीरेन्द्रनाथ मिश्र ( डेक्कन कॉलेज ,पूना ), आर.सी. अग्रवाल,डॉ. विजय कुमार, हरिश्चंद्र मिश्रा ( राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ) का महत्वपूर्ण योगदान है I
प्रश्न 12. राजस्थान की किन नदियों के किनारे पूर्व -पाषाणकालीन उपकरण प्राप्त हुए ?
उत्तर – चम्बल,बनास एवं सहायक नदियों के किनारे
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व्याख्या :- प्राचीन मानव सभ्यताओं का उद्भव सामान्यत: नदियों एवं घाटियों में हुआ था I राजस्थान में भी अजमेर ,अलवर, जयपुर,जालोर चित्तोड़,भीलवाडा ,पाली,झालावाड ,जोधपुर एवं टोंक क्षेत्रों की चम्बल,बनास और उनकी सहायक नदियों के किनारे राजस्थान के पूर्व-पाषाणकाल के उपकरण प्राप्त या खोजे गये I
प्रश्न 13. राजस्थान के जालोर से पूर्व पाषाणकालीन उपकरणों की खोज किसने की ?
उत्तर – बी. आल्चिन द्वारा
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व्याख्या :- राजस्थान के भू-भाग पर भी पूर्व-पाषाणकाल की संस्कृति का प्रसार था तथा राजस्थान के जालोर क्षेत्र से इस युग के उपकरण या साक्ष्य खोजने का श्रेय बी.आल्चिन को जाता है I
प्रश्न 14. राजस्थान के किन क्षेत्रों से मध्य -पाषाणकालीन उपकरण प्राप्त हुए ?
उत्तर – लूनी नदी ( पश्चिम राजस्थान ), बेडच नदी ( चित्तोड़ ) एवं विराटनगर से
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व्याख्या :- राजस्थान में जैस्पर,एगेट, कार्नेलियन ,कवार्टजाईट, कल्सेडोनी पाषाणों से बने उपकरण लूनी नदी ,बेडच नदी एवं विराट नगर से मध्य-पाषाणकालीन उपकरण मिले है I
प्रश्न 15. राजस्थान में मिले पत्थरों के छोटे, हल्के एवं कुशलता से निर्मित मध्य-पाषाणकालीन उपकरणों को किस नाम से जाना गया ?
उत्तर – लघु-पाषाण उपकरण या माईक्रोलिथ
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व्याख्या :- राजस्थान में प्राप्त ब्लेड ( Blade ), इग्रेवर ( Engraver ), ट्रेपेज ( Trapeze ), पॉइंटर ( Pointer ), ट्रायंगल ( Triangle ), क्रेसेंट ( Crecent ) और स्क्रेपर ( Scraper ) नामक पत्थर के बने छोटे ,हल्के एवं कुशलता से निर्मित इन मध्यकालीन पाषाण उपकरणों को लघु पाषाण उपकरण या माईक्रोलिथ कहा गया I
प्रश्न 16. राजस्थान में किन स्थानों से भारत के अन्य भागों की तरह उत्तर नव -पाषाण कालीन सभ्यता के उपकरण प्राप्त हुए है ?
उत्तर – बागोर ( भीलवाडा ) एवं तिलवाड़ा ( मारवाड़ ) से प्राप्त उपकरण
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व्याख्या :- राजस्थान के अजमेर ,सीकर,नागौर,जयपुर,झुंझुनू , उदयपुर,चितोड़ एवं जोधपुर में भी भारत के अन्य भागों की तरह उत्तर नव पाषाण काल के उपकरण एवं सभ्यता के साक्ष्य मिले जिसमें भीलवाडा के बागोर तथा मारवाड़ के तिलवाड़ा मुख्य स्थान है I
प्रश्न 17. राजस्थान में धातु काल के तहत गणेश्वर एवं कालीबंगा नामक प्राचीन स्थलों का संबध है ?
उत्तर – ताम्रकालीन संस्कृति से
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व्याख्या :- राजस्थान में अनेक स्थलों से ताम्र-पाषाण,ताम्र या ताम्र -कांस्य या ताम्रकाल के अवशेष मिले है, जिसमे गणेश्वर ( सीकर ), कालीबंगा ( हनुमानगढ़ ) मुख्य ताम्र कालीन संस्कृति के प्राचीन स्थल है I राजस्थान के अन्य ताम्र -पाषण या ताम्र-काल के स्थल निम्नानुसार है –
| ताम्र-कालीन प्राचीन स्थल का नाम | संबधित जिलें का नाम |
| गणेश्वर | सीकर |
| कालीबंगा | हनुमानगढ़ |
| गिलुण्ड | उदयपुर |
| पिंड-पांडलियां | चित्तोड़ |
| आहद-झाडोल | उदयपुर |
| कुराड़ा | नागौर |
| नन्दलाल पूरा,किराडोत एवं चिथवाडी | जयपुर |
| पुगल-साबनियाँ | बीकानेर |
| बुढा-पुष्कर | अजमेर |
| एलाना | जालोर |
| कोल माहोली | सवाईमाधोपुर |
| मलाह | भरतपुर |
प्रश्न 18. मानव इतिहास में ताम्र-पाषाण,ताम्र कांस्य के बाद किस धातु का ज्ञान एवं प्रयोग एक महत्वपूर्ण घटना थी ?
उत्तर – लौहे का ज्ञान
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व्याख्या : – ताम्र एवं कांस्य काल के बाद लौहे का ज्ञान होना एक मानव इतिहास की महत्वपूर्ण युग परिवर्तन करने वाली घटना थी ,जिससे खेती के औजारों एवं उपकरणों,हथियारों की गुणवत्ता बढ़ गई I
प्रश्न 19. राजस्थान के किन स्थानों से लौह गलाने की भट्टियाँ एवं अस्त्र-शस्त्र बनाने के कारखानों के अवशेष मिले है ?
उत्तर – जोधपुरा ( जयपुर ) एवं सुनारी ( झुंझुनू )
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व्याख्या :- राजस्थान में लौह संस्कृति के समय के अवशेष तथा उपकरण नोह ( भरतपुर ), जोधपुरा ( जयपुर ), सुनारी ( झुंझुनू ) और रैढ ( टोंक ) से प्राप्त हुए I
प्रश्न 20. प्राचीन राजस्थान में किस स्थान को टाटा नगर की संज्ञा दी गई ?
उत्तर – रैढ ( टोंक )
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व्याख्या : – राजस्थान में अनेक स्थानों से लौह संस्कृति के अवशेष मिले है ,जिसमें लौह धातु की अधिकता के कारण राजस्थान के रैढ ( टोंक ) को राजस्थान के टाटा नगर की संज्ञा दी गई I
प्रश्न 21. भारत में किस स्थान से प्राप्त लौहे के अवशेष को लौह युग के आरम्भ होने की सीमा रेखा निर्धारित करने का मुख्य स्रोत कहा गया ?
उत्तर – नोह ( भरतपुर )
Explanation 👇
व्याख्या :- राजस्थान के भरतपुर जिले के नोह स्थान से प्राप्त लौह अवशेष ,उपकरण भारत में लौह-युगीन सभ्यता के आरम्भ होने के स्रोत है I
प्रश्न 22. राजस्थान में सलेटी रंग की चित्रित मृदभांड संस्कृति ( Painted Grey Ware -PGW ) के अवशेष किन स्थानों से मिले है ?
उत्तर – विराटनगर एवं जोधपुरा ( जयपुर ) , सुनारी ( झुंझुनू ) एवं नोह ( भरतपुर )
Explanation 👇
व्याख्या :- राजस्थान में भी भारत के अन्य भागों की तरह लौह काल के बाद विराटनगर एवं जोधपुरा,सुनारी तथा नोह में सलेटी रंग की चित्रित मृदभांड संस्कृति (PGW) के अवशेष एवं उपकरण प्राप्त हुए I इस संस्कृति का उदय 600 ई.पू में हुई I
प्रश्न 23. राजस्थान में किस सभ्यता को हडप्पा से भी प्राचीन विकसित मानी जाती है ?
उत्तर – कालीबंगा सभ्यता ( हनुमानगढ़ )
Explanation 👇
व्याख्या :- राजस्थान में वर्तमान घग्घर नदी क्षेत्र ( प्राचीन सरस्वती ,दृषद्वती नदी घाटी क्षेत्र ) हनुमानगढ़ जिले में स्थित कालीबंगा हडप्पा से भी पहले विकसित हुई I यह सभ्यता 6000 हजार वर्ष से अधिक प्राचीन मानी जाती है I
प्रश्न 24. राजस्थान के हनुमानगढ़ जिलें की प्राचीन सभ्यता कालीबंगा का नाम किस कारण पड़ा ?
उत्तर – खुदाई में मिली काली चूड़ियों के कारण
Explanation 👇
व्याख्या :- राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित प्राचीन ताम्र सभ्यता कालीबंगा में खुदाई के दौरान काली चूड़ियाँ प्राप्त हुई तथा पंजाबी भाषा में चूड़ियों को बंगा कहा जाता है I कालीबंगा की सर्वप्रथम खोज 1952 ई.में अमलानंद घोष ने की I
प्रश्न 25. राजस्थान की प्राचीन सभ्यता जिसके उत्खनन कार्य में पांच स्तर सामने आए ?
उत्तर – कालीबंगा सभ्यता ( हनुमानगढ़ )
Explanation 👇
व्याख्या :- राजस्थान की कालीबंगा सभ्यता के उत्खनन में पांच स्तर सामने आए जिस में से दो स्तर हडप्पा सभ्यता से भी प्राचीन एवं अन्य स्तर हडप्पा सभ्यता के समकालीन है I इसलिए कालीबंगा को प्राक हडप्पा सभ्यता एवं हडप्पा सभ्यता दो भागों में बांटा गया है Iयह उत्खनन कार्य 1961-62 ई.में बी.बी. लाल एवं बी.के. थापर द्वारा किया गया I
Very good,real and NCERT book inspired notes.
Good 👍