राजस्थान इतिहास, कला एवं संस्कृति |Class 1-5 NCERT CBSE NOTES IN Hindi For REET, RPSC, RSSB, TEACHER & SSC

Examsahayata में ” NCERT CBSE NOTES Class 1-5 In Hindi “ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं REET, DELED, RPSC, RSSB, TEACHER & SSC के उपयोगी महत्वपूर्ण GK Questions प्रस्तुत है, कक्षा 1 से 5 तक राजस्थान इतिहास एवम् संस्कृति पर आधारित एनसीईआरटी प्रेरित सरल एवं आसान विश्लेषण है, जिसे पढ़कर आप अपनी तैयारी सुदृढ़ कर सकते हैं –

▪️ राजस्थान इतिहास एवम् संस्कृति, कला, साहित्य

राजस्थान के पश्चिम भाग में थार रेगिस्तान में स्थित जैसलमेर जिला लोककला, किले, हवेलियों की नक्काशी के लिए जाना जाता है।

  • जैसलमेर में कालबेलिया नृत्य, मांड गायन और कठपुतली खेल तथा अलगोजा पर “पधारो म्हारे देश ” का संगीत अद्भुत है।
  • जैसलमेर का किला सूरज की रोशनी में सोने की तरह चमक के कारण सोनारगढ़ के नाम से जाना जाता है।
  • सोनारगढ़ एक अनोखा किला है जिसमें किले के अंदर छोटे घर, दुकानें और मंदिर बने हुए हैं।
  • गड़ीसर झील : जैसलमेर के लोगों के लिए पानी का मुख्य स्रोत गड़ीसर झील है तथा यह एक पर्यटन स्थल भी है।
  • पटवों की हवेली : राजस्थान के जैसलमेर में बनी सुंदर एवम् विशाल पटवों की हवेली पांच अलग-अलग हवेलियों का समूह है।
  • नथमल की हवेली के दरवाजे एवम् खंभों की नक्काशी आकर्षण का केंद्र आज ही बनी हुई है।
  • सालिम सिंह की हवेली मोर के गर्दन की तरह बनाई गई है। इन सभी हवेलियों की नक्काशी एवं झरोखे प्रसिद्ध है।

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिलें में रणथंभोर टाइगर सफारी, रणथंभोर किला एवम् रणथंभोर राष्ट्रीय उद्यान प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है।

  • रणथंभोर किला : राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित किले का नाम रणथंभोर किला है तथा यहां के शासक हम्मीर देव चौहान थे।
  • रणथंभोर किले तक ऊपर पहुंचने के लिए सात दरवाजे हैं एवं किले में प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर स्थित है।
  • राजस्थान के करौली जिलें में कैलादेवी, मदनमोहन जी एवम् श्री महावीर जी दर्शनीय स्थल है।
  • केलादेवी का लख्खी मेला एवम् लांगुरिया गीत प्रसिद्ध है।

राजस्थान की मेवाड़ रियासत में महाराणा मोकल एवं रानी सौभाग्यवती के सुपुत्र महाराणा कुम्भा सन् 1433 से 1468 तक मेवाड़ के शासक रहे और उनके शासनकाल को विद्वानों ने “मेवाड़ का स्वर्णकाल ” की संज्ञा दी है।

  • महाराणा कुम्भा ने अपनी मालवा- गुजरात विजय (महमूद खिलजी को पराजित करने पर) के अवसर पर चित्तौड़गढ़ दुर्ग में नौ मंजिला “विजय स्तंभ” का निर्माण करवाया।
  • चितौड़गढ़ दुर्ग में स्थित विजय स्तंभ को देवी- देवताओं का अजायबघर कहा जाता है।
  • महाराणा कुम्भा के कवि श्यामलदास ने अपनी पुस्तक “वीर विनोद ” में वर्णित किया कि राजस्थान के 84 किलों में से 32 किले महाराणा कुम्भा ने बनवाया है।
  • महाराणा कुम्भा द्वारा बनाए कुंभलगढ़, अचलगढ एवम् बसंतगढ़ प्रसिद्ध किले है तथा मंडन कुम्भा का मुख्य वास्तुकार था।
  • विश्व की दूसरी सबसे बड़ी चौड़ी एवं लंबी दीवार कुंभलगढ़ के परकोटे की दीवार है, जिस पर एक साथ चार घोड़े दौड़ सकते हैं
  • कुंभलगढ़ के ऊपर बना एक भीतरी दुर्ग कटारगढ़ महाराणा कुम्भा का निवास स्थान है, जिसे मेवाड़ की आंख कहा गया है।
  • महाराणा कुम्भा एक महान संगीतकार के साथ साथ कुशल वीणा वादक भी थे। उनकी वीणा का नाम ‘ वल्कि ‘ था।
  • संगीतकला का प्रमुख ग्रन्थ ‘ संगीतराज ‘ महाराणा कुम्भा ने लिखा तथा महाराणा कुम्भा की बेटी रमा बाईं भी वीणा वादक के रूप में दक्ष थी।
  • मेवाड़ी भाषा में लिखा नाटक ‘ एकलिंग महात्म्य ‘ मेवाड़ वंश के कुलदेवता पर आधारित साहित्यक नाटक है।
  • राजस्थान में संगीत साहित्य और कला को बढ़ावा देने के लिए महाराणा कुम्भा को विद्वानों ने ” अभिनव भरताचार्य ” की उपाधि दी है।

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