केंद्र सरकार ने पीएमओ का नाम बदला

02 दिसंबर 2025 ,मंगलवार को मोदी सरकार ने Prime Minister’s Office (PMO) अर्थात् प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का नाम बदलकर ‘Seva Teerth ‘रख दिया गया है। इस निर्णय के साथ ही कई अन्य सरकारी भवनों, सचिवालयों और राजभवनों के नामों में भी बदलाव हुआ है

कौन-कौन सी संस्थाओं के नाम बदले गए

अब तक बदले बड़े नामों की सूची 2025

नाम जो पहले था बदलाव के बाद नाम टिप्पणी
पीएमओ ( Prime Minister’s Office )
का नया परिसर
सेवा तीर्थ ( Sewa Teerth )02 दिसम्बर,2025
नए पीएमओ परिसर का नामकरण
( Central Vista के पुनर्विकास के तहत )
केन्द्रीय सचिवालय
( Central Secretarit )
कर्तव्य भवन ( Kartavya Bhavan )सरकारी आदेश द्वारा बदला गया
पुराना पीएम आवास
( Race Course Road )
लोक कल्याण मार्ग
( Lok Klayan Marg )
2016 के आसपास पहला बड़ा नाम
बदलाव किया गया
राजपथ ( Rajpath )कर्तव्य पथ ( Kartvya Path )पहले सत्ता का प्रतीक लेकिन अब
कर्तव्य एवं जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है
राज्यों के राज्यपालों के कार्यालय
( राज भवन )
लोक भवन / लोक निवास
Lok Bhawan / Lok Niwas
2025 में गृह मंत्रालय के आदेशानुसार
औपनिवेशिक सवेंदना को हटाना

सरकार ने ये नाम-परिवर्तन क्यों किया? — उद्देश्य और तर्क

सरकार का कहना है कि यह कदम सिर्फ नाम बदलने का नहीं, बल्कि “सत्ता से सेवा” की दिशा में प्रशासन की सोच बदलने का प्रतीक है। नए नामों में “सेवा”, “कर्तव्य”, “लोक” जैसे शब्दों के प्रयोग से यह संदेश जाता है कि सरकार स्वयं को जनता की सेवा में तत्पर मानती है — अधिकार या शक्ति नहीं Iनामों में यह बदलाव सांस्कृतिक और नैतिक बदलाव की भावना को दर्शाता है — इसे शासन के दृष्टिकोण और प्रशासन की नई पहचान I

आलोचना और चिंताएँ

हालांकि सरकार इसे सेवा-केंद्रित प्रशासन का प्रतीक बता रही है, विपक्ष और कुछ आलोचकों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं —

  • उनका कहना है कि सिर्फ नाम बदलने से काम नहीं सुधरता। है, इन बदलावों के पीछे वास्तविक प्रशासनिक सुधार या नीति पर काम की बजाय प्रतीकात्मकता को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • कुछ का तर्क है कि समस्याएं जस की तस हैं, लेकिन नाम बदलकर उनको हल समझने की कोशिश है। इसलिए, यह देखा जाना होगा कि नाम बदलने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य-प्रणाली, पारदर्शिता और जनकल्याण की वास्तविक पहल कितनी होती है I

व्यापक अर्थ —प्रशासन में बदलाव की शुरुआत

सरकार द्वारा नामों का यह बदलाव प्रतीकात्मक रुप से महत्वपूर्ण है ,सरकारी भवनों के नाम सेवा,लोक,कर्तव्य से जोड़ना जनता-केन्द्रित, पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना पर बल देता है Iजो प्रशासनिक सुधार,बेहतर कार्यप्रणाली,जवाबदेही और जन कल्याण पर असल प्रयास के बदलाव सांस्कृतिक और व्यवहारिक दोनों स्तरों पर असर दिखा सकता है सर्कार का मानना है की शासन अब सत्ता से सेवा की ओर झुकाव को दिखाता है और प्रशासनिक दृष्टिकोण ,नीति -निर्माण एवं सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार होगा I

निष्कर्ष

नाम बदलना ,चाहे यह Prime Minister’s Office हो, राजभवन, सचिवालय या अन्य केंद्र, एक प्रतीकात्मक शुरुआत हो सकती है। यह बताता है कि शासन ने अब “सत्ता” से “सेवा” की ओर झुकाव दिखाया है।लेकिन असली बदलाव तब होगा — जब सिर्फ नाम नहीं, बल्कि प्रशासनिक दृष्टिकोण, नीति-निर्माण व सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार होगा I

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Frequently Asked Questions (FAQs)


1️⃣ पीएमओ का नया नाम क्या है ?

उत्तर- प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नए परिसर का नाम अब “सेवा तीर्थ” रखा गया है। यह नाम सरकार की “सत्ता नहीं, सेवा” वाली सोच को दर्शाता है।


2️⃣ पीएमओ का नाम सेवा तीर्थ क्यों रखा गया ?

उत्तर – नाम बदलने के पीछे उद्देश्य है कि प्रधानमंत्री कार्यालय सत्ता का प्रतीक न रहे, बल्कि जनसेवा, कर्तव्य और राष्ट्रहित के लिए समर्पण को दर्शाए। इसलिए “सेवा” शब्द को प्राथमिकता दी गई।


3️⃣ क्या केवल पीएमओ का नाम बदला है या अन्य सरकारी भवनों के भी नाम बदले गए हैं ?


उत्तर- हाँ, कई सरकारी भवनों और संस्थानों के नाम बदले गए हैं।

उदाहरण के लिए — राजपथ → कर्तव्य पथ | राजभवन → लोक भवन / लोक निवास | केंद्रीय सचिवालय → कर्तव्य भवन | Race Course Road → लोक कल्याण मार्ग


4️⃣ सरकार नाम क्यों बदल रही है ?


उत्तर- सरकार का कहना है कि नाम बदलाव औपनिवेशिक, सत्ता-प्रधान और शाही प्रतीकों को हटाकर, जनता-केंद्रित, सेवा-मुखी और भारतीय सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।


5️⃣ क्या नाम बदलने से प्रशासनिक कामकाज पर कोई असर पड़ेगा?


उत्तर- सरकार के अनुसार नाम बदलाव प्रशासनिक सोच में परिवर्तन और सेवा-भावना उत्पन्न करने के लिए है। हालांकि आलोचक मानते हैं कि वास्तविक सुधार तभी दिखेगा जब कार्य-प्रणाली, पारदर्शिता और जनकल्याण में भी सुधार होगा।


6️⃣ क्या नाम बदलाव से जनता को कोई सीधा लाभ होगा?


उत्तर- प्रत्यक्ष लाभ नहीं, लेकिन प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश जाता है कि सरकारी संस्थाएँ जनता की सेवा के लिए हैं, न कि शक्ति प्रदर्शन के लिए। वास्तविक लाभ नीतियों और प्रशासन में सुधार से ही मिलेगा।


7️⃣ क्या आगे भी और नाम बदले जा सकते हैं?


उत्तर- संभावना है कि भविष्य में अन्य सरकारी भवनों, परिसरों और संस्थानों के नाम भी भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और लोकतांत्रिक संदेश के अनुसार बदले जाएँ।

Coution

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