हाल ही में चर्चा में रही GPS spoofing (जीपीएस स्पूफिंग) के बारे में जानकारी संक्षेप और स्पष्ट रूप से समझिए — क्या है, कैसे होती है, दुनिया/भारत में कहाँ-कहाँ हुई है, और इससे भारत पर क्या असर पड़ा है।

GPS Spoofing क्या है?

GPS स्पूफिंग एक तरह का साइबर हमला/इंटरफेरेंस है जिसमें हमलावर नकली GPS/सैटेलाइट सिग्नल भेजकर प्राप्तकर्ता (जैसे विमान, जहाज, वाहन या अन्य डिवाइस) को गलत स्थान, समय या डेटा दिखाते हैं।

असल GPS सैटेलाइट सिग्नल के बजाय फेक सिग्नल ट्रांसमिट किए जाते हैं।इससे नेविगेशन सिस्टम गलत पोजीशन/डेटा मान लेता है।केवल सिग्नल ब्लॉक करने वाला जैमिंग नहीं, स्पूफिंग तो डेटा को गलत दिशा में ले जाता है।

यह कैसे की जाती है?

सिग्नल फेक करना:

स्पूफर एक RF ट्रांसमीटर का उपयोग करके GPS फ्रिक्वेंसी पर नकली सिग्नल्स प्रसारित करते हैं, जो GPS रिसीवर को असली के बजाय उन नकली सिग्नलों को सही मानने पर मजबूर करते हैं।

नेविगेशन डेटा बदलना:

GPS रिसीवर लोकेशन, समय, मार्ग आदि गणनाएँ सैटेलाइट सिग्नल्स से करता है। अगर इसे जाली सिग्नल मिलें तो वो गलत निर्देश दिखाता है।

एयरक्राफ्ट जैसे सिस्टमों में यह तब होता है जब रिसीवर नकली सिग्नल को अधिक मजबूत दिखने वाला समझ लेता है और असली सिग्नल को अनदेखा कर देता है।

दुनिया भर में GPS स्पूफिंग – हाल की घटनाएँ

वैश्विक विमानन में बढ़ती रिपोर्टें

2024 में 4.3 लाख GPS जामिंग/स्पूफिंग रिपोर्टेड हुईं, जिसमें दुनिया भर में यात्री विमानों की नेविगेशन सटीकता प्रभावित हुई।

यह खासकर संघर्ष/सीमा क्षेत्रों (Conflict Zones) जैसे मध्य पूर्व, Black Sea, आदि में तेजी से हो रहा है।

नौवहन और अन्य क्षेत्रों पर भी प्रभाव

स्पूफिंग समुद्री जहाजों में भी गलत स्थान दिखा सकता है जिससे कोलिजन या रूट डिसरप्शन का खतरा रहता है।

वित्तीय और दूरसंचार प्रणालियाँ भी GPS समय पर निर्भर हैं — इन पर टाइमिंग हमले प्रभाव डाल सकते हैं।

भारत में GPS स्पूफिंग – हाल की चर्चाएँ और प्रभाव

  • सरकार की जानकारी के अनुसार भारत में कई प्रमुख हवाई अड्डों के आस-पास GPS/ GNSS स्पूफिंग और इंटरफेरेंस के घटनाएँ दर्ज हुईं हैं:
  • दिल्ली/IGIA, मुंबई,कोलकाता,हैदराबाद,बेंगलुरु,अमृतसर चेन्नईऔर अन्य स्थान — जहाँ विमानों के GPS डेटा में छेड़छाड़ (interference) के मामले सामने आए।
  • केंद्र सरकार ने बताया कि नवंबर 2023 से अब तक लगभग 1,951 GPS/GNSS हस्तक्षेप (interference) के मामले सामने आए हैं, जिसमें कई GPS स्पूफिंग भी शामिल हैं।

DGCA की प्रतिक्रिया

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने हवाई मार्गों में GPS spoofing की सूचना मिलने पर10 मिनट के भीतर रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी है ताकि त्वरित जांच हो सके।

कुछ उड़ानों ने नेविगेशन डेटा गड़बड़ होने की सूचना दी।Contingency Procedures के जरिये उड़ानें सुरक्षित ढंग से संचालित की गईं (जैसे conventional नेविगेशन सिस्टम का उपयोग)।

GPS स्पूफिंग का प्रभाव (भारत में और वैश्विक स्तर पर)

विमानन सुरक्षा जोखिम

GPS spoofing पायलटों को गलत डेटा दिखा सकता है, जिससे रास्ता भटकना, गलत अलर्ट, किनारे की ऊँचाई में भ्रम जैसे खतरनाक स्थिति बन सकती हैं।

हालांकि अभी तक कोई बड़ा एयरक्राफ्ट हादसा रिपोर्ट नहीं हुआ, लेकिन यह संचालन/सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता

  • सीमाओं के नजदीक GPS/GNSS हस्तक्षेप को सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी में लिया है।
  • यह तकनीक अब केवल बड़े देशों तक सीमित नहीं — अपराधी समूह और गैर-राज्य अभिनेता भी इसका उपयोग कर सकते हैं।
  • GPS समय कई वित्तीय/संचार सिस्टम पर निर्भर है — स्पूफिंग से समय सिंक्रोनाइज़ेशन में गड़बड़ी हो सकती है।
  • विमानन और सुरक्षा एजेंसियाँ GPS spoofing की जड़ तक पहुँचने के लिए जांच कर रही हैं।
  • DGCA ने SOP और त्वरित रिपोर्टिंग नियम जारी किए हैं ताकि रेड-फ्लैग/इंसिडेंट जल्द पता चलें।
  • तकनीकी समाधान जैसे GNSS मॉनिटरिंग, रेडंडेंसी (INS, GAGAN/NAVIC), और सिग्नल ऑथेंटिकेशन पर काम बढ रहा है,दुनिया भर में और भारत में भी शोध जारी है।

संक्षेप

GPS Spoofing एक गंभीर इंटरफेरेंस तकनीक है, जो नकली सिग्नल भेजकर नेविगेशन सिस्टम को भ्रमित करती है। यह अब सिर्फ युद्ध-क्षेत्र या सीमा इलाकों तक सीमित नहीं रह गयी है, बल्कि भारत के मुख्य एयरपोर्ट्स के आस-पास भी इसकी गतिविधियाँ रिपोर्ट हुई हैं, जिससे विमानन सुरक्षा और नेविगेशन सिस्टम की सटीकता पर असर पड़ रहा है। सरकार और एजेंसियाँ इससे निपटने के लिए सक्रिय हैं।

GPS Spoofing से निपटने के लिए दुनिया तीन स्तरों पर काम कर रही है—

🔹 Receiver में anti-spoofing क्षमताएँ

🔹 Multi-sensor बैकअप सिस्टम

🔹 Nationwide monitoring & NAVIC integrationभारत में भी DGCA, ISRO और DRDO इस दिशा में तेजी से सुधार कर रहे हैं।

नीचे GPS Spoofing पर परीक्षा-उपयोगी 10 MCQ दिए जा रहे हैं, प्रत्येक के साथ संक्षिप्त लेकिन सटीक व्याख्या (Explanation) भी शामिल है।
ये SSC, State Exams, Defence, REET, BSTC, B.Ed Entrance और किसी भी Current Affairs/Tech Exam में उपयोगी रहेंगे।
GPS Spoofing – MCQ (with Explanation)

Q1. GPS Spoofing का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?

A) GPS सिग्नल को पूरी तरह बंद करना

B) नकली GPS सिग्नल भेजकर डिवाइस को गलत लोकेशन दिखाना

C) GPS की गति बढ़ाना

D) सैटेलाइट की संख्या कम करना

उत्तर: B

Explanation

Explanation: GPS Spoofing में हमलावर असली सिग्नलों जैसे दिखने वाले फेक सिग्नल भेजता है ताकि रिसीवर गलत लोकेशन/समय दिखाए।

Q2. निम्न में से कौन सा GPS Spoofing और GPS Jamming के बीच अंतर बताता है?

A) स्पूफिंग GPS को तेज़ बनाती है

B) जामिंग सिग्नल ब्लॉक करती है, स्पूफिंग गलत डेटा देती है

C) स्पूफिंग सिग्नल बंद करती है

D) दोनों एक ही हैं

उत्तर: B

Explanation
  • Explanation: Jamming = सिग्नल ब्लॉकSpoofing = नकली सिग्नल भेजकर डेटा गड़बड़दोनों खतरे हैं लेकिन प्रभाव अलग है।

Q3. भारत में GPS Spoofing सबसे अधिक किस क्षेत्र से संबंधित रिपोर्ट हुई है?

A) कृषि

B) एविएशन (Airports के आसपास)

C) शिक्षा

D) उद्योग

उत्तर: B

Explanation

Explanation: DGCA ने बताया कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु आदि एयरपोर्ट्स पर कई GPS/GNSS इंटरफेरेंस और स्पूफिंग के मामले दर्ज हुए।

Q4. DGCA ने GPS Spoofing की रिपोर्टिंग के लिए पायलटों को कितना समय दिया है?

A) 1 घंटा

B) 30 मिनट

C) 10 मिनट

D) 24 घंटे

उत्तर: C

Explanation

Explanation: DGCA के नए नियम के अनुसार, GPS/GNSS interference मिलने पर 10 मिनट के अंदर रिपोर्ट करना अनिवार्य है।

Q5. GPS Spoofing से बचाव के लिए विमान कौन सा बैकअप सिस्टम उपयोग करते हैं?

A) Blockchain system

B) Inertial Navigation System (INS)

C) Solar navigation

D) Magnetic route system

उत्तर: B

Explanation

Explanation: INS सैटेलाइट पर निर्भर नहीं होता।GPS गलत होने पर विमान INS के डेटा पर स्विच हो जाता है।

Q6. भारत का स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम कौन सा है जो GPS Spoofing की स्थिति में बैकअप दे सकता है?

A) GSLV

B) NAVIC / IRNSS

C) GSAT

D) EDUSAT

उत्तर: B

Explanation

Explanation: NAVIC भारत का स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम है जो उच्च-सटीकता और एन्क्रिप्टेड सिग्नल देता है।

Q7. निम्न में से कौन सा Spoofing Detection तकनीक का हिस्सा है?

A) Signal strength anomaly detection

B) Solar interference

C) Magnetosphere scanning

D) Temperature drift

उत्तर: A

Explanation

Explanation: Anti-spoofing एल्गोरिदम असामान्य सिग्नल स्ट्रेंथ, फेज अंतर, दिशा आदि का विश्लेषण करके फेक सिग्नल का पता लगाते हैं।

Q8. RAIM तकनीक का उपयोग किसके लिए किया जाता है?

A) GPS encryption

B) Faulty GPS satellites को हटाना

C) Fuel बचाना

D) विमान की गति बढ़ाना

उत्तर: B

Explanation

Explanation: RAIM (Receiver Autonomous Integrity Monitoring)गलत/फॉल्टी सैटेलाइट सिग्नल को पहचानकर exclude कर देता है।

Q9. GPS Spoofing से किस प्रकार का खतरा सबसे बड़ा माना जाता है?

A) नेटवर्क स्पीड बढ़ना

B) नेविगेशन सिस्टम का गलत मार्ग दिखाना

C) मौसम खराब होना

D) विमान का ईंधन बढ़ना

उत्तर: B

Explanation

Explanation: गलत पोजीशन, गलत दिशा, गलत समय — यह एविएशन के लिए गंभीर सुरक्षा जोखिम बन सकता है।

Q10. हाल के वर्षों में GPS Spoofing/Interference की वैश्विक घटनाएँ क्यों बढ़ी हैं?

A) सैटेलाइट की संख्या कम होने से

B) संघर्ष क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध बढ़ने से

C) मोबाइल फोन बढ़ने से

D) GPS का उपयोग घटने से

उत्तर: B

Explanation

Explanation: Middle East, Black Sea, Russia-Ukraine जैसे संघर्ष क्षेत्रों में electronic warfare बढ़ने के कारण GPS spoofing तेजी से बढ़ी है।

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