Examsahayata द्वारा प्रस्तुत NCERT CBSE Notes (Class 1–5) को प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से विश्लेषित किया गया है। यह सामग्री विशेष रूप से REET, DELED, RPSC, RSSB Teacher, SSC एवं अन्य शिक्षक एवं सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है। प्रत्येक अध्याय के मूल सिद्धांत, महत्वपूर्ण तथ्य, उदाहरण एवं संभावित परीक्षा प्रश्नों को व्यवस्थित ढंग से शामिल किया गया है, ताकि अभ्यर्थी अपनी आधारभूत समझ को सुदृढ़ कर सकें।
🔹 कला, साहित्य, देवी देवता एवं संस्कृति
👁️🗨️ रामायण : मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम
▪️ भगवान श्रीराम को अपनी मर्यादा, सत्य एवं कर्तव्य निष्ठा के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता हैं। श्रीराम अयोध्या के राजा दशरथ एवम् रानी कौशल्या के पुत्र थे I
▪️ भगवान श्रीराम के चार भाई थे, जिनके नाम राम, भरत, लक्ष्मण एवम् शत्रुघ्न है। ये सभी भाई गुरु वशिष्ठ के आश्रम में वेद, धनुर्विद्या और नीतिशास्त्र का ज्ञान प्राप्त किया तथा भगवान् श्रीराम बचपन से ही सत्य, शील एवं धैर्य में परिपक्व थे।
▪️ विश्वामित्र : विश्वामित्र ने एक बार जंगल में राक्षसों से ऋषियों की रक्षा के लिए अयोध्या के राजा दशरथ से उनके पुत्र राम एवं लक्ष्मण की मांग की तथा दोनों भाइयों को जंगल में रहकर ऋषियों, यज्ञों एवं शांति स्थापित करने को कहा, राम और लक्ष्मण ने ताड़का नामक राक्षस का वध कर जंगल में ऋषियों की सुरक्षा की एवं अन्याय और अधर्म के खिलाफ खड़े होने का संदेश दिया।
▪️ श्रीराम-सीता का विवाह : श्रीराम सीता विवाह के पीछे मान्यता है कि मिथिला के राजा जनक ने अपनी पुत्री के स्वयंवर के लिए घोषणा की कि जो युवक शिवधनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी से माता सीता का विवाह किया जाएगा, भगवान श्रीराम ने आसानी से अदम्य शक्ति एवं संयम से प्रत्यंचा का कार्य कर दिखाया, इस प्रकार सीता का स्वयंवर पूर्ण हुआ तथा श्रीराम-सीता का विवाह संपन्न हुआ।
▪️ श्री राम का राज्याभिषेक एवम् वनवास : अयोध्या में भगवान राम के राज्याभिषेक की तैयारी हो रही थी, तब राम की सौतेली मां कैकई ने अयोध्या के राजा दशरथ से पूर्व में दिए दो वचन मांग लिए जिसमें (i) राम को चौदह वर्ष का वनवास (ii) अपने पुत्र भरत को अयोध्या का राजा बनाया जाए। श्रीराम ने अपने पिता के वचनों की पालना करते हुए अपने भाई लक्ष्मण एवं माता सीता के साथ राजमहल छोड़ दिया और 14 वर्षों के लिए वनवास में जाने का निश्चय किया तथा माता-पिता, गुरुजन की आज्ञा का पालन करने का संदेश दिया।
▪️ वनवास एवं सीता हरण : 14 वर्षों के वनवास के दौरान लंका के राजा रावण ने माता सीता का छल द्वारा हरण कर लिया, राम ने नीति, योजना एवं पराक्रम से वानर सेना की मदद से लंकापति रावण का वध कर धर्म की स्थापना की, तत्पश्चात अयोध्या लौटने पर एक आदर्श राम राज्य की स्थापना की, इस प्रकार राम का चरित्र हर युग में लोगों के लिए आदर्श बना रहेगा।
👁️🗨️ गौ-रक्षक लोकदेवता
▪️ गौ-रक्षक तेजाजी : लोकदेवता तेजाजी का जन्म राजस्थान के नागौर जिले के खरनाल गांव में हुआ तथा तेजाजी के पिता का नाम ताहड़देव और माता का नाम रामकुंवरी था I
▪️ तेजाजी बाल्यकाल से ही वीरता एवं साहस के गुणों के धनी थे, उन्होंने अपना जीवन गौ माता की रक्षा एवं सेवा के लिए समर्पित कर दिया। एक बार लुटेरे उनके गांव से गायों को लेकर जाने लगे तो तेजाजी ने उन लुटेरों का डटकर सामना किया और लुटेरों से गायों को बचाया तभी से उन्हें गौ-रक्षक देवता कहा जाने लगा।
▪️ राजस्थान में भाद्रपद शुक्ल दशमी को तेजदशमी के रूप में मनाया जाता है तथा तेजाजी के पूजा स्थल को ‘थान ‘ कहा जाता है, इस दिन लोग थान पर तेजाजी के त्याग, बलिदान ओर समाज सेवा को याद करने के लिए पूजा स्वरूप खीर का भोग लगाया जाता है।
▪️ लोक देवता तेजाजी के अलावा राजस्थान में रामदेवजी, पाबूजी, बिग़गाजी, हड़बू जी, खडबूजी ओर करणी माता तथा पर्यावरण वैज्ञानिक जम्भेश्वर भगवान ने भी पशु एवं पर्यावरण संरक्षण एवं मानव कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।
▪️ जाहरपीर गोगाजी : राजस्थान के लोकदेवताओं में प्रमुख स्थान रखने वाले गोगाजी, जिन्हें श्रद्धापूर्वक जाहरपीर कहा जाता है, गौ-रक्षा, वीरता और लोकआस्था के प्रतीक माने जाते हैं। उनका जन्म प्रचलित मान्यताओं के अनुसार लगभग 10वीं–11वीं शताब्दी में वर्तमान ददरेवा (जिला चूरू) में हुआ। उनके पिता का नाम जेवर (या जावर) सिंह और माता का नाम बाछल देवी माना जाता है। गोगाजी चौहान वंश से संबद्ध माने जाते हैं और बचपन से ही अद्भुत साहस, नेतृत्व क्षमता तथा धर्मनिष्ठा के लिए प्रसिद्ध थे।
▪️ एक बार आक्रमणकारी उनके गांव के पास से गायों को लूटकर लेकर जा रहे थे तो गोगाजी ने गायों को बचाने के लिए लुटेरों से डटकर वीरता से युद्ध कर आक्रमणकारियों को मार गिराया लेकिन अंततः वो वीरगति को प्राप्त हो गए।
▪️ पाबूजी ऊंटों के देवता : लोक देवता पाबूजी ने भी गायों एवं ऊंटों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, इतना ही नहीं, एक बार पाबूजी को उनके विवाह के समय खबर मिली कि कुछ लोग गायों को लेकर जा रहे हैं, तो पाबूजी अपने विवाह के फेरे अधूरे छोड़ कर गायों को बचाने लुटेरों से युद्ध करने निकल पड़े तथा लड़ते हुए अपने प्राण त्याग दिए।
👁️🗨️ पुष्कर मेला अजमेर
▪️ राजस्थान के अजमेर जिले के पुष्कर मेला विश्व का सबसे बड़ा ऊंटों का मेला है, यह मिला ऊंटों की सजावट एवं ऊंटों की दौड़ के लिए प्रसिद्ध है।
▪️ पुष्कर में पुष्कर सरोवर एक दर्शनीय स्थल है, जहां लोग स्नान एवं पूरा वातावरण मंत्रों से मनमोहक लगता है।
▪️ अजमेर के पुष्कर में एक ब्रह्मा मंदिर है जो विश्व का एकमात्र ब्रह्मा जी का भव्य मंदिर है।
▪️ पुष्कर मेले में मुख्य आकर्षण पारंपरिक पोशाक घाघरा- चोली, रस्सा-कशी का खेल, ऊंटों की दौड़, मटका फोड़ खेल और राजस्थान का पारंपरिक खाना दाल-बाटी मुख्य है। इसके अलावा दाल-बाटी चूरमा, कढ़ी, मिर्ची के टीपोरे, गट्टे की सब्जी तथा गरमा गरम मालपूए प्रसिद्ध है। कुल मिलाकर यह मेला राजस्थान की संस्कृति, खेल एवम् परंपराओं का अनोखा अनुभव कराता है।
👁️🗨️ राजस्थान के बालवीर
▪️ सुशीला : बहादुर सुशीला ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों का विरोध कर अपने गांव में अच्छा संदेश दिया, इसके लिए सुशीला को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया।
▪️ कुंभाराम : राजस्थान के करौली जिले की हिंडोन सीटी तहसील के सिकरौदा जाट गांव के पंद्रह वर्षीय कुंभाराम ने 27 सितंबर 1999 को स्कूल जाते हुए रेलवे ट्रैक की टूटी पटरी की सूचना तीन किमी दूर महावीर जी स्टेशन की तरफ स्थित केबिन में देकर बड़ी दुर्घटना से बचाया। इस बहादुरी के लिए कुंभाराम को 26जनवरी 2001 को गणतंत्र दिवस परेड से पहले प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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