राष्ट्रीय पक्षी दिवस ( National Birds Day)
- राष्ट्रीय पक्षी दिवस हर वर्ष 5 जनवरी को मनाया जाता है, जो पक्षियों के संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता फैलाता है।
- यह दिन 2002 में अमेरिका के एवियन वेलफेयर कोएलिशन (AWC) और बोर्न फ्री यूएसए द्वारा शुरू किया गया।
- राजस्थान में गोडावण और मोर जैसे पक्षियों के लिए विशेष महत्व रखता है।
इतिहास और शुरुआत
- राष्ट्रीय पक्षी दिवस की शुरुआत 2002 में एवियन वेलफेयर कोएलिशन और बोर्न फ्री यूएसए ने की, जो अमेरिका के क्रिसमस बर्ड काउंट के साथ जुड़ा।
- चार्ल्स एलमैन्जो बैबकॉक ने 1894 में अमेरिका में पहला पक्षी दिवस प्रस्तावित किया था।
- अब यह USA, कनाडा, UK, भारत सहित कई देशों में मनाया जाता है, हालांकि मुख्यतः अमेरिका-केंद्रित।
उद्देश्य
- मुख्य उद्देश्य पक्षियों के कल्याण, आवास संरक्षण और खतरों (जैसे अवैध व्यापार, जलवायु परिवर्तन, कैद) के प्रति जागरूकता है।
- यह जंगली और पालतू पक्षियों की सुरक्षा पर जोर देता है, जहां विश्व की 12% पक्षी प्रजातियां लुप्तप्राय हैं
- भारत में आर्द्रभूमि संरक्षण पर फोकस।
वैश्विक उत्सव
- यह दिन मुख्य रूप से USA में उत्सवित होता है, लेकिन कनाडा, भारत, UK जैसे देशों में भी पक्षी प्रेमी मनाते हैं।
- कार्यक्रमों में बर्ड वॉचिंग, दाना चढ़ाना, कार्यशालाएं शामिल।
- संयुक्त राष्ट्र का वर्ल्ड माइग्रेटरी बर्ड डे अलग (मई) है, 118 देशों में।
भारत और राजस्थान में संरक्षण कार्य
- भारत ने 2020 में मध्य एशियाई फ्लाईवे के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की, जो 2027 तक प्रवासी पक्षी जनसंख्या स्थिर करने का लक्ष्य रखती है
- राजस्थान में प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (2013 से) गोडावण हैचरी चला रहा,
- 2025 में जैसलमेर में AI से चूजा जन्मा।
- केवलादेव (भरतपुर) में 370+ प्रजातियां, रामसर साइट संरक्षित।
- मोर मौतें रोकने हेतु कार्यशालाएं।
राष्ट्रीय पक्षी दिवस पर पक्षियों के संरक्षण के ताज़ा वैश्विक आँकड़े चिंताजनक हैं, जो लुप्तप्रायता संकट को दर्शाते हैं। IUCN रेड लिस्ट के अनुसार, विश्व की 61% पक्षी प्रजातियाँ घट रही हैं, मुख्यतः वनों की कटाई से। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में चरम गर्मी से 1980 से पक्षी आबादी एक-तिहाई (25-38%) घटी।
प्रमुख वैश्विक आँकड़े
- घटती प्रजातियाँ: 48,646 पक्षी प्रजातियाँ (कुल मूल्यांकित का बड़ा हिस्सा) लुप्तप्राय, जिनमें 223 क्रिटिकली एंडेंजर्ड।
- आबादी ह्रास: उत्तर अमेरिका में 1970 से 29 करोड़ प्रजनन पक्षी गायब (30% कमी); विश्व स्तर पर घासभूमि पक्षी 53% घटे।
- भविष्य अनुमान: अगले 100 वर्षों में 500+ प्रजातियाँ विलुप्त हो सकतीं, जिसमें 250-350 को विशेष पुनर्वास चाहिए; 200 वर्षों में 1300+।
- पिछली हानि: लेट प्लिस्टोसीन से 610+ ज्ञात विलुप्तियाँ, 92% मानवीय कारणों से; अनदेखी 55%।
बिश्नोई समुदाय का योगदान
बिश्नोई समुदाय राजस्थान का एक प्रमुख पर्यावरण रक्षक समुदाय है, जो पक्षी संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।29 नियमों (जग जग होली, कुरुक्षेत्र के गुरु जम्भेश्वर द्वारा 1485 में प्रतिपादित) के अनुसार वे वन्यजीवों को हानि नहीं पहुँचाते।
- गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) संरक्षण: बिश्नोई इसे अपना गौरव का प्रतीक मानते हैं। 1980 में सऊदी राजकुमार के शिकार का विरोध किया, डाक टिकट जारी कराया। 2025 में जैसलमेर में 200 एकड़ भूमि दान कर शिकारी-मुक्त घासभूमि विकसित की, जहां स्वदेशी सेवन घास लगाई।
- हैबिटेट बहाली: खेतोलाई गाँव में BNHS के साथ मिलकर आक्रामक प्रजातियाँ (प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा) हटाई, 30 हेक्टेयर क्षेत्र सुधारा। केटोलाई पंचायत में BCCAs (बस्टार्ड कम्युनिटी कंजर्व्ड एरिया) बनाए
- जागरूकता और निगरानी: राधेश्याम बिश्नोई (गोडावण मैन, 1997-2025) ने 2010 से चरवाहों, स्कूलों में अभियान चलाए, ड्रोन/जीपीएस से निगरानी। बिश्नोई टाइगर फोर्स शिकारियों को पकड़ती, वन विभाग को सूचित।
- ऐतिहासिक बलिदान: 1730 में अमृता देवी ने खेजड़ी वृक्ष बचाने को 363 बलिदान दिए, जो वन्यजीव संरक्षण की प्रेरणा। भारत सरकार अमृता देवी पुरस्कार देती।
वैश्विक संरक्षण आँकड़ों से जुड़ाव
- 61% पक्षी प्रजातियाँ घट रही हैं, लेकिन बिश्नोई जैसे समुदायों ने गोडावण चूजों को बचाया (2022-23 में 5-6), जो IUCN क्रिटिकली एंडेंजर्ड प्रजाति है I
उपसंहार – राष्ट्रीय पक्षी दिवस हर साल 5 जनवरी को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पक्षियों के महत्व, उनके संरक्षण और उनकी घटती संख्या के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसे विश्व के कई देशों में मनाया जाता है ताकि लोग पक्षियों के संरक्षण की चुनौतियों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान को समझ सकें।
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